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Sports News: 36 गेंद, 72 रन और पाकिस्तान की सनसनीखेज जीत, सलीम मलिक ने ईडन गार्डन्स में बदल दिया था मैच का रुख

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | सलीम मलिक ने 1987 में ईडन गार्डन्स पर भारत के खिलाफ 36 गेंदों में नाबाद 72 रन बनाकर पाकिस्तान को दो विकेट से जीत दिलाई थी। जानिए उस यादगार पारी की पूरी कहानी।

डेस्क, 17 अगस्त। क्रिकेट इतिहास में कुछ पारियां ऐसी होती हैं जिन्हें आंकड़ों से ज्यादा उनके असर के लिए याद किया जाता है। पाकिस्तान के पूर्व बल्लेबाज सलीम मलिक की 18 फरवरी 1987 को कोलकाता के ईडन गार्डन्स में खेली गई 36 गेंदों की पारी भी ऐसी ही थी। भारत ने बड़ा स्कोर खड़ा किया था और पाकिस्तान एक समय दबाव में दिखाई दे रहा था, लेकिन मलिक ने क्रीज पर आते ही मैच की तस्वीर बदल दी। उन्होंने सिर्फ 36 गेंदों में नाबाद 72 रन ठोककर पाकिस्तान को दो विकेट से जीत दिला दी। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के आधिकारिक स्कोरकार्ड में भी मलिक को इस मुकाबले का प्लेयर ऑफ द मैच दर्ज किया गया है।

सलीम मलिक की बल्लेबाजी की सबसे खास पहचान उनकी कलाई का शानदार इस्तेमाल था। वह गेंद को केवल ताकत से सीमा रेखा के पार भेजने के बजाय टाइमिंग और प्लेसमेंट से रन निकालने के लिए जाने जाते थे। उनके शॉट्स में एक खास तरह की सहजता दिखाई देती थी। इंग्लैंड के पूर्व कप्तान डेविड गॉवर ने उनकी बल्लेबाजी की इसी खूबसूरती को 'मखमली दस्तानों' जैसा बताया था।

लेकिन मलिक के क्रिकेट करियर की कहानी सिर्फ उनकी खूबसूरत बल्लेबाजी तक सीमित नहीं रही। बाद के वर्षों में मैच फिक्सिंग से जुड़े विवादों ने उनकी पहचान पर गहरी छाप छोड़ी। यही वजह है कि उनके शानदार क्रिकेट प्रदर्शन की कई कहानियां अक्सर विवादों के पीछे दब जाती हैं। मगर ईडन गार्डन्स की वह पारी आज भी उनके क्रिकेट कौशल की सबसे बड़ी मिसालों में गिनी जाती है।

जब श्रीकांत ने पाकिस्तान के सामने रखा बड़ा लक्ष्य

18 फरवरी 1987 को भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबला कोलकाता के ईडन गार्डन्स में खेला गया था। मैच 40-40 ओवर का कर दिया गया था। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 238 रन बनाए। कृष्णमाचारी श्रीकांत ने शानदार 123 रन की पारी खेली और भारत को मजबूत स्थिति तक पहुंचाया। मोहम्मद अजहरुद्दीन ने भी 49 रन बनाए। आधिकारिक स्कोरकार्ड के मुताबिक भारत ने 40 ओवर में 6 विकेट पर 238 रन बनाए।

पाकिस्तान के सामने लक्ष्य आसान नहीं था। शुरुआती दौर में हालांकि टीम ने अच्छी शुरुआत की। रमीज राजा और यूनिस अहमद ने मिलकर 100 से ज्यादा रन जोड़ दिए। लेकिन साझेदारी टूटने के बाद पाकिस्तान के विकेट तेजी से गिरने लगे।

एक समय पाकिस्तान का स्कोर 161 रन पर पांच विकेट हो चुका था। मैच भारत के पक्ष में जाता हुआ दिखाई दे रहा था। यहीं से कहानी में सलीम मलिक की एंट्री हुई।

दबाव में आए और गेंदबाजों पर टूट पड़े

मलिक जब बल्लेबाजी के लिए आए तो पाकिस्तान को तेजी से रन बनाने की जरूरत थी। लक्ष्य तक पहुंचने के लिए समय कम था और विकेट लगातार गिर रहे थे। लेकिन मलिक ने स्थिति को समझते हुए रक्षात्मक रुख अपनाने के बजाय भारतीय गेंदबाजों पर हमला बोल दिया।

उन्होंने मनिंदर सिंह के खिलाफ तेजी से रन बटोरे। इसके बाद कपिल देव समेत भारतीय गेंदबाजों पर भी लगातार दबाव बनाया। उनकी बल्लेबाजी में इतनी तेजी थी कि कुछ ही ओवर में मैच का संतुलन भारत से पाकिस्तान की तरफ झुकने लगा।

रिकॉर्ड के मुताबिक मलिक ने 36 गेंदों में 72 रन बनाए। उनकी पारी में 11 चौके और एक छक्का शामिल था। उनका स्ट्राइक रेट 200 रहा।

सबसे खास बात यह थी कि उन्होंने यह पारी तब खेली जब पाकिस्तान को हर गेंद के साथ बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ रहा था।

एक गलती भारत को पड़ी भारी

इस मुकाबले में मलिक को एक जीवनदान भी मिला था। मनिंदर सिंह की गेंद पर मलिक क्रीज से बाहर निकल आए थे, लेकिन भारतीय विकेटकीपर चंद्रकांत पंडित स्टंपिंग का मौका नहीं भुना सके।

इसके बाद मलिक ने भारतीय टीम को कोई दूसरा मौका नहीं दिया। उन्होंने उसी जीवनदान को अपनी पारी का आधार बना लिया और लगातार आक्रामक बल्लेबाजी करते रहे।

आधिकारिक स्कोरकार्ड के अनुसार पाकिस्तान ने 39.3 ओवर में 8 विकेट खोकर 241 रन बनाए और दो विकेट से मुकाबला जीत लिया। मलिक 72 रन बनाकर नाबाद रहे।

कपिल देव और मनिंदर सिंह पर जमकर बरसे

मलिक की पारी की रफ्तार का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने भारतीय गेंदबाजों के खिलाफ लगातार बाउंड्री लगाईं। उस दौर में 200 के स्ट्राइक रेट से वनडे पारी खेलना बेहद असाधारण बात थी।

मैच के आंकड़े बताते हैं कि मलिक ने 36 गेंदों पर 11 चौके और एक छक्का लगाया। यानी उनके 72 में से 50 रन सिर्फ चौके-छक्कों से आए।

कपिल देव ने उस मुकाबले में दो विकेट लिए, जबकि रवि शास्त्री भारत के सबसे सफल गेंदबाज रहे और उन्होंने चार विकेट झटके। इसके बावजूद मलिक की तेज पारी पाकिस्तान को लक्ष्य तक ले जाने में निर्णायक साबित हुई।

सातवें नंबर पर आए और मैच जीतकर लौटे

इस कहानी का एक दिलचस्प पहलू मलिक का बल्लेबाजी क्रम भी था। वह उस समय टीम में ऊपर बल्लेबाजी करने का अवसर चाहते थे। उनके अनुसार उन्हें उम्मीद थी कि उन्हें वन डाउन भेजा जाएगा, लेकिन पाकिस्तान की पारी में शुरुआती बल्लेबाजों और मध्यक्रम के खिलाड़ियों को पहले भेजा गया।

मलिक आखिरकार सातवें नंबर पर बल्लेबाजी करने आए। जब वह क्रीज पर पहुंचे तो पाकिस्तान मुश्किल में था। लेकिन उन्होंने अपने बल्लेबाजी क्रम या परिस्थितियों को बहाना नहीं बनाया। कुछ ही देर में उन्होंने मैच को पूरी तरह बदल दिया।

उनकी पारी की सबसे बड़ी खूबी यह रही कि उन्होंने परिस्थिति के हिसाब से बल्लेबाजी की। जहां गेंद को रोकने की जरूरत थी, वहां टाइमिंग का इस्तेमाल किया और जहां मौका मिला, वहां आक्रामक शॉट खेलकर रन गति बढ़ा दी।

आखिरी ओवर तक पहुंचा रोमांच

पाकिस्तान लक्ष्य के करीब पहुंचा तो मुकाबला बेहद रोमांचक हो गया। भारत ने लगातार विकेट लेकर वापसी की कोशिश की, लेकिन मलिक क्रीज पर टिके रहे। उन्होंने अंत तक जिम्मेदारी संभाली और पाकिस्तान को जीत तक पहुंचाकर ही दम लिया।

आंकड़े बताते हैं कि पाकिस्तान ने 39.3 ओवर में 241 रन बनाकर मुकाबला अपने नाम किया। भारत ने 238 रन बनाए थे। इस तरह पाकिस्तान को दो विकेट से जीत मिली। मलिक को उनकी मैच जिताऊ पारी के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

एक पारी जिसने इतिहास में बनाई अलग जगह

क्रिकेट में शतक को अक्सर बड़ी पारी का पैमाना माना जाता है, लेकिन सलीम मलिक की यह पारी बताती है कि मैच जिताने के लिए हमेशा तीन अंकों का स्कोर जरूरी नहीं होता।

36 गेंदों में 72 रन, 11 चौके और एक छक्का—ये आंकड़े अपने आप में उनकी आक्रामकता बताते हैं। लेकिन इस पारी की असली अहमियत इस बात में थी कि उन्होंने इसे उस समय खेला जब पाकिस्तान के हाथ से मैच निकलता हुआ नजर आ रहा था।

आज भी ईडन गार्डन्स में भारत-पाकिस्तान क्रिकेट की पुरानी यादों की चर्चा होती है तो 18 फरवरी 1987 का यह मुकाबला जरूर सामने आता है। कृष्णमाचारी श्रीकांत की 123 रन की शानदार पारी के बावजूद उस दिन चर्चा का केंद्र अंततः सलीम मलिक बने।

मलिक के करियर को बाद के विवादों ने भले ही अलग पहचान दे दी हो, लेकिन क्रिकेट के मैदान पर उनके हुनर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ईडन गार्डन्स की 72 रन की वह पारी इसी बात की याद दिलाती है कि कभी-कभी एक बल्लेबाज की कुछ गेंदें पूरे मैच की कहानी बदल देती हैं।

ईडन गार्डन्स की उस पारी के खास आंकड़े

मैच: भारत बनाम पाकिस्तान, दूसरा वनडे

तारीख: 18 फरवरी 1987

मैदान: ईडन गार्डन्स, कोलकाता

भारत: 238/6

पाकिस्तान: 241/8

नतीजा: पाकिस्तान 2 विकेट से विजयी

सलीम मलिक: 72* रन

गेंदें: 36

चौके: 11

छक्का: 1

स्ट्राइक रेट: 200

प्लेयर ऑफ द मैच: सलीम मलिक

सलीम मलिक की उस पारी से एक बड़ी सीख

बड़े मैचों में दबाव से निपटना किसी भी खिलाड़ी की असली परीक्षा होती है। मलिक की यह पारी इसलिए खास थी क्योंकि उन्होंने व्यक्तिगत उपलब्धि से ज्यादा परिस्थिति को समझकर बल्लेबाजी की। पाकिस्तान को जिस समय तेजी से रन चाहिए थे, उन्होंने वही भूमिका निभाई और मैच को अपनी टीम के पक्ष में मोड़ दिया।

आज के तेज क्रिकेट के दौर में 36 गेंदों पर 72 रन शायद सामान्य से लगे, लेकिन 1987 के वनडे क्रिकेट में यह पारी अपने आप में असाधारण थी। यही कारण है कि दशकों बाद भी ईडन गार्डन्स की उस रात का जिक्र होते ही सलीम मलिक की विस्फोटक बल्लेबाजी याद आ जाती है।

एक शानदार बल्लेबाज की विरासत

सलीम मलिक के करियर का मूल्यांकन केवल उनके विवादों के आधार पर करना उनके क्रिकेट कौशल की पूरी तस्वीर पेश नहीं करता। वह पाकिस्तान के ऐसे बल्लेबाज रहे जिनके पास तकनीक, टाइमिंग और आक्रामकता का अनोखा मिश्रण था।

उनकी ईडन गार्डन्स वाली पारी इसका सबसे चमकदार उदाहरण है। उन्होंने उस दिन दिखाया कि बल्लेबाजी सिर्फ रन बनाने का नाम नहीं, बल्कि सही समय पर मैच की दिशा बदलने की कला भी है।

ईडन गार्डन्स में दर्ज हुई एक यादगार पारी

18 फरवरी 1987 की वह शाम भारत के लिए निराशा और पाकिस्तान के लिए यादगार जीत लेकर आई। श्रीकांत की शतकीय पारी के बाद भी भारत मुकाबला नहीं बचा सका। दूसरी तरफ सलीम मलिक ने निचले क्रम से उतरकर ऐसा हमला किया कि भारतीय गेंदबाज देखते रह गए।

उनकी 36 गेंदों की 72 रन की नाबाद पारी आज भी भारत-पाकिस्तान वनडे क्रिकेट की यादगार पारियों में शामिल है।

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जब एक छोटी पारी ने बदल दी पूरी कहानी

क्रिकेट में महान पारी की पहचान हमेशा शतक से नहीं होती। कभी-कभी 30-40 गेंदों की बल्लेबाजी भी ऐसी छाप छोड़ जाती है जिसे दशकों तक भुलाया नहीं जा सकता। सलीम मलिक की ईडन गार्डन्स वाली पारी इसी श्रेणी में आती है।

उनके सामने लक्ष्य था, समय कम था और विकेट गिर चुके थे। ऐसे में उन्होंने जोखिम उठाया और आक्रामक बल्लेबाजी को अपना हथियार बनाया। नतीजा यह रहा कि पाकिस्तान ने मैच अपने नाम कर लिया।

यह पारी क्रिकेट के उस दौर की भी याद दिलाती है जब एक बल्लेबाज की टाइमिंग और कलाई का इस्तेमाल विपक्षी गेंदबाजी पर भारी पड़ सकता था। मलिक की बल्लेबाजी में यही खूबी दिखाई देती थी।

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